Sunday, 28 May 2017
Thursday, 25 May 2017
लेखक परिचय
केशवसुत परिचय
केशवसुत को आधुनिक मराठी कविता का जनक माना जाता है। हिन्दी में जो स्थान भारतेन्दु का है, वही मराठी में केशवसुत का है। केशवसुत के जन्म के समय के बारे में निश्चित सूचना उपलब्ध नहीं है। उनका जन्म सामान्यत: लोग 1886 ई. में मानते हैं। साधारण परिवार में पैदा होने के कारण उनकी शिक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं हो पायी। 25 वर्ष की उम्र में वे मैट्रिक पास कर सके थे। अंतर्मुखी वे बचपन से ही थे। भीड़-भाड़ से दूर रहकर बहुआ प्राकृतिक दृश्यों के बीच एकांत में बैठना उन्हें रुचिकार था। काव्य के प्रति आरंभ से ही आकर्षण था। यहाँ तक कि एक बार काव्य-चर्चा में मग्न रहने के कारण परीक्षा भवन में जाना ही भूल गए थे।
कार्यक्षेत्र
आजीविका के लिए केशवसुत ने विभिन्न स्थानों में अध्यापक का कार्य किया। काव्य के क्षेत्र में उनका पदार्पण 'रघुवंश' के एक अंश के अनुवाद के साथ हुआ था। फिर वे राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों में काव्य रचना करने लगे। यद्यपि उन्होंने विद्यालय मेंलोकमान्य तिलक से शिक्षा पाई थी, पर सक्रिय राजनीति में वे कभी सम्मिलित नहीं हुए। केशवसुत की रचनाओं में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव था। वे जाति, वर्ग और वर्ण भेद को देश की परतंत्रता का कारण मानते थे। उन्होंने स्त्री-शिक्षा का समर्थन किया। अस्पृश्यता और बाल विवाह के विरुद्ध केशवसुत ने आवाज़ उठाई।
अपने पूर्ववती कवियों की भाँति उन्होंने भजन या राजा-महाराजाओं की स्तुति का गान नहीं किया। उनकी कविताओं में विषय होते थे- जन-जीवन की समस्याएँ और लोगों की कठिनायाँ। इन विषयों में काव्य रचने वाले केशवसुत मराठी भाषा के पहले कवि थे। साथ ही उन्होंने मनोरम प्रकृति चित्रण और बाल सुलभ भोलेपन का भी बहुत मार्मिक वर्णन किया।
निधन
केशवसुत को बहुत ही कम जीवन मिला और 39 वर्ष की उम्र में प्लेग के कारण 1905 ई. में उनका निधन हो गया फिर भी वे मराठी काव्य- जगत को नई दिशा प्रदान करने वाले माने जाते हैं।
Tuesday, 23 May 2017
Monday, 22 May 2017
कविता -महादेवी वर्मा
तितली
मेह बरसने वाला है
मेरी खिड़की में आ जा तितली।
बाहर जब पर होंगे गीले,
धुल जाएँगे रंग सजीले,
झड़ जाएगा फूल, न तुझको
बचा सकेगा छोटी तितली,
खिड़की में तू आ जा तितली!
नन्हे तुझे पकड़ पाएगा,
डिब्बी में रख ले जाएगा,
फिर किताब में चिपकाएगा
मर जाएगी तब तू तितली,
खिड़की में तू छिप जा तितली।
मेह बरसने वाला है
मेरी खिड़की में आ जा तितली।
बाहर जब पर होंगे गीले,
धुल जाएँगे रंग सजीले,
झड़ जाएगा फूल, न तुझको
बचा सकेगा छोटी तितली,
खिड़की में तू आ जा तितली!
नन्हे तुझे पकड़ पाएगा,
डिब्बी में रख ले जाएगा,
फिर किताब में चिपकाएगा
मर जाएगी तब तू तितली,
खिड़की में तू छिप जा तितली।
Sunday, 21 May 2017
डॉ. मोहन तिवारी 'आनंद'
दोहे-
पंचतत्व से घट बना, आये दस के काम।
दूजे को सुख बाँटकर, पाये खुद आराम।।
प्रेम मोहब्बत से जिओ, बैर-बुराई-त्याग।
दिल देकर दिल जीतिये, कर सच्चा अनुराग।।
छुरा-तमंचा से नहीं, कोई पाया जीत।
प्रेम और सद्भाव से, जग को बाँधे प्रीति।।
संस्कार मत भूलना, ये भारत के लोग।
दुनियाँ पीछे चलेगी, आयेगा संयोग।।
चाहो हिंसा जीतना, करो अहिंसक काम।
दुनिया में हो जायेगा, बापू जैसा नाम।।
डॅा.मोहन तिवारी ‘आनंद’
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